‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को छात्रों का जोरदार समर्थन, 52 हजार निबंध अपलोड

देहरादून, 18 अगस्त । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आह्वान पर शुरू किए गए ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को विद्यार्थियों का उत्साहजनक समर्थन मिल रहा है। ‘सीएम विद्यार्थी मंथन डॉट कॉम’ पोर्टल पर अब तक 52 हजार के करीब विद्यार्थियों ने अपने निबंध अपलोड किए हैं। कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थी पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक समेत आठ विषयों पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने विद्यार्थियों से पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा करने को कहा था। उन्होंने कहा था कि विद्यार्थियों के विचारों का स्वयं अवलोकन किया जाएगा और उपयोगी सुझावों को राज्य की नीतियों में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अभियान के तहत श्रेष्ठ विचार प्रस्तुत करने वाले 140 विद्यार्थियों के साथ शासन के सचिवों की मौजूदगी में विचार-विमर्श करने तथा विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा करने की बात कही थी। सरकार ने श्रेष्ठ विचार देने वाले विद्यार्थियों को करियर और परीक्षा की तैयारी में छात्रवृत्ति देने के साथ अन्य पुरस्कार देने की भी घोषणा की है।

अभियान के तहत निबंध पोर्टल पर अपलोड करते ही विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में अभियान को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थी भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि यह देश में अपनी तरह का पहला अभियान है, जिसमें जेनरेशन जी और अल्फा पीढ़ी के विद्यार्थी एक साथ भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लगातार निबंध पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं और विद्यार्थियों में इसे लेकर खासा उत्साह है। उन्होंने बताया कि निबंध अपलोड करने की अंतिम तिथि 24 अगस्त है। विद्यार्थियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने विचार पोर्टल पर साझा करने की अपील की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं अभियान की निगरानी कर रहे हैं और प्रतिदिन इसकी समीक्षा कर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों की सोच और सुझावों को सामने लाकर उत्तराखंड के भविष्य के विकास की दिशा में युवा विजन को नीति निर्माण से जोड़ना है।

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