देहरादून, 04 नवंबर । उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के तहत सरकारी भूमि के उपयोग को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ किया है कि निवेश के लिए दी जाने वाली जमीनों का मालिकाना हक पूरी तरह सरकार के पास सुरक्षित रहेगा। निजी निवेशकों को केवल निर्धारित परियोजनाओं के विकास और संचालन का सीमित अधिकार दिया जाएगा। इसे सरकारी जमीनों की बिक्री या निजीकरण बताना सही नहीं है।
उनियाल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि संबंधित अनुबंधों के तहत भूमि का स्वामित्व, नियामक नियंत्रण और निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसे राज्य को वापस लेने का अधिकार सरकार के पास रहेगा। निवेशकों को दिए जाने वाले अधिकार कड़ी शर्तों, चरणबद्ध विकास, निवेश प्रतिबद्धताओं और पर्यावरणीय मानकों के अधीन होंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से आतिथ्य सत्कार क्षेत्र में 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे पांच हजार से अधिक प्रत्यक्ष और 10 हजार से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इसके अलावा राज्य को 200 से 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि परिसंपत्ति मुद्रीकरण की यह प्रक्रिया केंद्र सरकार की स्थापित नीति के अनुरूप है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और रेल भूमि विकास प्राधिकरण जैसी संस्थाएं भी इस व्यवस्था को अपनाती हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों का स्वामित्व बनाए रखते हुए उनकी आर्थिक क्षमता का उपयोग करना है।
उनियाल ने कांग्रेस के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें एचएमटी, आईडीपीएल, लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों और उद्यान विभाग के बगीचों की जमीनों को बेचने की बात कही जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ये सभी संपत्तियां अभी अपने मूल विभागों के पास सुरक्षित हैं। आतिथ्य सत्कार और अन्य विकास कार्यों के लिए चिह्नित भूमि के कुछ भूखंड अभी मास्टर प्लान और प्रारंभिक व्यवहार्यता परीक्षण के चरण में हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रोजगार के सीमित अवसर और पलायन बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में अनुपयोगी परिसरों और उपलब्ध भूमि का इस्तेमाल औद्योगिक एवं पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय युवाओं के साथ किसानों, टैक्सी संचालकों, होटल कारोबारियों, दुकानदारों, ठेकेदारों और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को भी लाभ मिल सकता है।
भाजपा नेता ने कांग्रेस के भूमि बचाओ अभियान पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी निवेश और विकास से जुड़े मुद्दों पर भ्रम फैला रही है। उन्होंने कांग्रेस से अपने शासनकाल में हुए भूमि आवंटनों पर भी जवाब देने को कहा। उन्होंने नानीसार प्रकरण, धौलास भूमि विवाद, टाटा मोटर्स-सिडकुल भूमि आवंटन, एनएच-74 में मुआवजे से जुड़ा मामला और सिडकुल में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए।
उनियाल ने दावा किया कि राज्य में करीब 13 हजार एकड़ सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल भूमि अभिलेख और व्यवस्थित भूमि प्रबंधन की दिशा में भी काम कर रही है। सरकारी जमीन का स्वामित्व सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के लिए करना सरकार की नीति है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विरोध की राजनीति के बजाय निवेश और रोजगार के नए अवसरों की जरूरत है। उन्होंने प्रदेशवासियों से यूआईआईडीबी को लेकर किए जा रहे प्रचार के प्रति सतर्क रहने की अपील की।