रोडवेज के निजीकरण पर भडक़े कर्मचारी,चंडीगढ़ डिपो में किया प्रदर्शन

चंडीगढ़, 04 सितंबर । हरियाणा रोडवेज के निजीकरण और निजी परमिट देने के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को रोडवेज कर्मचारियों ने प्रदेशभर के डिपो में दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को चंडीगढ़ डिपो में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निजीकरण की नीतियां वापस लेने की मांग की। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान नहीं किया तो जल्द ही निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

डिपो प्रधान राजेश बेरला और सचिव रविंदर यादव ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के साथ बातचीत में जिन मांगों पर सहमति जताई थी, उन्हें लागू करने की बजाय रोडवेज में सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने के स्थान पर निजी परमिट जारी किए जा रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि 16 जून को परिवहन मंत्री के साथ हुई वार्ता में रोडवेज के बेड़े में 500 नई बसें शामिल करने की घोषणा की गई थी और कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति जताते हुए 40 दिन में दोबारा बैठक का आश्वासन दिया गया था।

यूनियन नेताओं ने 362 रूटों पर 3648 निजी परमिट देने तथा निजी इलेक्ट्रिक बसों को 62.37 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से चलाने के फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि एक इलेक्ट्रिक बस के स्थान पर छह साधारण बसें संचालित की जा सकती हैं। यदि प्रत्येक डिपो में प्रस्तावित 50-50 इलेक्ट्रिक बसों के स्थान पर 300-300 साधारण सरकारी बसें शामिल की जाएं तो प्रदेश में रोडवेज का बेड़ा करीब 7200 से अधिक बसों तक पहुंच सकता है। उनके अनुसार एक बस से औसतन छह लोगों को रोजगार मिलता है।

राजेश बेरला और रविंदर यादव ने चालक का वेतनमान 54,100 रुपये, परिचालक व लिपिक का 35,400 रुपये करने तथा वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग की। इसके अलावा बकाया बोनस का भुगतान, खाली पदों पर पदोन्नति, 2016 के चालकों समेत सभी कच्चे कर्मचारियों को न्यायालय के निर्णय के अनुसार पक्का करने, अर्जित अवकाश की पुरानी व्यवस्था बहाल करने, बकाया रात्रि ठहराव और ओवरटाइम का भुगतान करने की मांग रखी गई।

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