बीकानेर वेटरनरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को ऊंटनी के दूध पर शोध के लिए मिला पेटेंट

बीकानेर, 24 सितंबर । पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में मौजूद प्रोटीन हाइड्रोलायटेट के कार्यात्मक गुणों और जैवसक्रिय क्षमता को बढ़ाने वाली विशेष तकनीक विकसित की है। बीकानेर के वैज्ञानिकों को ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट मिला है।

शोधकर्ताओं डॉ. अनीता तंवर, डॉ. आर. के. बेरवाल, डॉ. योगेश कुमार और डॉ. अनिल हर्ष की टीम ने यह तकनीक विकसित की है। शोध के तहत ऊंटनी के दूध से प्राप्त प्रोटीन हाइड्रोलायटेट के कार्यात्मक गुणों तथा उसकी जैवसक्रिय क्षमता को बेहतर बनाने पर काम किया गया। ऊंटनी के दूध में मौजूद प्रोटीन और उनसे प्राप्त हाइड्रोलायटेट पर वैज्ञानिक अध्ययन का उद्देश्य इनके कार्यात्मक एवं जैवसक्रिय गुणों को समझना और संभावित उपयोगों के लिए बेहतर तकनीक विकसित करना है। बीकानेर के वेटरनरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का यह पेटेंट इसी दिशा में किए गए अनुसंधान से जुड़ा है।

दरअसल, राजस्थान में ऊंट पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालक समुदाय की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्रों में ऊंट कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी पालन योग्य पशु माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में ऊंटनी का दूध पशुपालक परिवारों के लिए दूध उत्पादन और आय का एक स्रोत रहा है। इसी कारण ऊंटनी के दूध के प्रसंस्करण, पोषण संबंधी विशेषताओं और इसके विभिन्न उपयोगों पर शोध की संभावनाएं बढ़ी हैं।

वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने वैज्ञानिक टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह अनुसंधान भविष्य में ऊंटनी के दूध की उपयोगिता बढ़ाने में सहायक होगा।

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