भोपाल में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग पर शिकंजा, नगर निगम ने हजारों दुकानदारों को थमाया नोटिस

भोपाल, 14 अगस्त । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद चल रहे अभियान के तहत निगम ने अब तक 3316 नोटिस जारी किए हैं। वहीं, न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त संपत्तियों के मामलों की भी समीक्षा की जा रही है।

जानकारी के लिए बता दें कि नगर निगम ने स्थगन आदेश वाले 144 मामलों की सूची तैयार की है। इन मामलों में न्यायालयीन आदेशों का परीक्षण करने के बाद जहां कार्रवाई की संभावना होगी, वहां स्थगन हटाने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद 100 से अधिक संपत्तियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा सकती है। आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले मामलों में नोटिस जारी करने के साथ एक हजार से अधिक संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

नगर निगम की इस सख्ती से उन क्षेत्रों के कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है, जहां आवासीय भवनों में दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी सहित कई क्षेत्रों में नोटिस मिलने के बाद कारोबारी वैकल्पिक व्यावसायिक स्थान तलाश रहे हैं।

नगर निगम की टीमें लगातार सर्वे और नोटिस जारी करने की कार्रवाई में जुटी हैं। अभियान के तहत हाल में 1135 नए नोटिस जारी किए गए हैं। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के तहत अब तक जारी नोटिसों की संख्या 3316 हो गई है। इनमें नरेला और हुजूर विधानसभा क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

निगम की सर्वे टीमें प्रमुख सड़कों को आधार बनाकर दोनों ओर स्थित संपत्तियों की जांच करेंगी। संबंधित वार्डों के संपत्ति कर अभिलेखों को भी खंगाला जाएगा। इसके माध्यम से संपत्ति के पंजीकृत उपयोग और मौके पर संचालित गतिविधि के बीच अंतर का पता लगाया जाएगा।

नगर निगम के अनुसार पांच अगस्त से पहले 1018 नोटिस जारी किए गए थे। इनमें अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कलां क्षेत्र में सर्वाधिक 429 नोटिस दिए गए थे। नए नोटिस जारी होने के बाद अभियान का दायरा और बढ़ गया है।

नगर निगम ने सभी जोन अधिकारियों को न्यायालय में लंबित मामलों का अभिलेख अद्यतन करने के निर्देश दिए हैं। जिन संपत्तियों को स्थगन अथवा यथास्थिति का आदेश मिला हुआ है, उनके न्यायालयीन आदेशों की प्रतियां लेकर उनका परीक्षण किया जा रहा है।

निगम की कार्रवाई में नदी किनारे, तालाबों की परिधि, हरित पट्टी, बफर जोन और जलग्रहण क्षेत्र में किए गए अनधिकृत निर्माण को प्राथमिकता से जांचा जाएगा। निगम अधिकारियों के अनुसार इन क्षेत्रों में भूमि उपयोग और निर्माण की वैधता का परीक्षण भी किया जाएगा।

नगर निगम उपायुक्त भुवन गुप्ता ने बताया कि नोटिस जारी करने, सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई लगातार जारी है। न्यायालय से स्थगन आदेश वाले मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। जहां आवश्यक होगा, स्थगन हटाने के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किए जाएंगे।

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