गर्भावस्था में दो लोगों का खाना जरूरी नहीं, संतुलित पोषण है अहम : डॉ. अदिति

अजमेर, 5 सितम्बर । गर्भावस्था में महिला को ‘दो लोगों के लिए खाना’ चाहिए, यह धारणा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। गर्भवती महिला के लिए भोजन की मात्रा से अधिक उसकी गुणवत्ता, पोषक तत्वों का संतुलन और चिकित्सकीय जरूरतों के अनुरूप आहार महत्वपूर्ण है। अधिक भोजन करने से गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यह जानकारी वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अदिति सिंह राव ने शनिवार को मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में न्यूट्रिशन वीक के शुभारंभ अवसर पर आयोजित प्रशिक्षण सत्र में दी।

न्यूट्रिशन वीक की शुरुआत हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टाफ को मरीजों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार की उपयोगिता और विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका के बारे में प्रशिक्षित करने के साथ हुई। पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से डॉ. अदिति सिंह राव ने दैनिक आहार में आवश्यक पोषक तत्वों, गर्भावस्था के दौरान खानपान तथा महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता हॉस्पिटल की वीपीओ डॉ. विद्या दायमा ने की।

डॉ. राव ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान कैलोरी और पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि महिला सामान्य मात्रा से कई गुना अधिक भोजन करने लगे। परिवारों में प्रचलित ‘दो के लिए खाना’ जैसी धारणा के कारण कई बार महिलाएं आवश्यकता से अधिक भोजन करने लगती हैं, जिससे पाचन संबंधी परेशानियां सामने आती हैं। उन्होंने संतुलित मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, आवश्यक कार्बोहाइड्रेट और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों को आहार में शामिल करने पर जोर दिया।

उन्होंने महिलाओं के मासिक धर्म के खत्म होने के बाद पोषण संबंधी लापरवाही को भी गंभीर विषय बताया। उनका कहना था कि गर्भावस्था में तो परिवार महिला के खानपान को लेकर सजग हो जाता है, लेकिन मासिक धर्म के खत्म होने के बाद पौष्टिक भोजन और पर्याप्त पोषण की जरूरत को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लंबे समय तक पोषण की कमी महिलाओं में कमजोरी और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

डॉ. राव ने कहा कि भारतीय भोजन को अक्सर ‘सात्विक’ कहकर पर्याप्त मान लिया जाता है, जबकि संतुलित आहार का अर्थ केवल शाकाहारी या सात्विक भोजन करना नहीं है। शरीर की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों का समुचित सेवन भी जरूरी है। विटामिन-डी और विटामिन-बी12 जैसी पोषक तत्वों की कमी से कमजोरी, थकान और बदन दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित योग, प्राणायाम और शारीरिक सक्रियता के साथ प्रोटीनयुक्त एवं संतुलित भोजन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मरीजों की देखभाल में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण है और पोषण संबंधी सही जानकारी मरीजों तथा उनके परिजनों तक पहुंचाना उपचार प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

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