हिसार पहुंचे भारत सहित कनाडा, ग्रीस और थाईलैंड से विशेषज्ञ, तकनीकी ज्ञान किया सांझा

तथा वैश्विक स्तर पर हो रहे परिवर्तनों से प्रतिभागियों को अवगत कराना रहा।

विश्वविद्यालय के सीआरएस सभागार में हुए इस आयोजन के समापन समारोह के मुख्यातिथि

विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. योगेश चाबा रहे। उन्होंने सम्मेलन को अत्यंत

उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन उद्योग और अकादमिक जगत के बीच संवाद

एवं सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रो. योगेश चाबा ने कहा

कि सम्मेलन से प्राप्त परिणामों का उद्देश्य उद्योग और अकादमिक जगत की सर्वोत्तम विशेषज्ञता

एवं अनुभवों को एक साथ लाना होना चाहिए, ताकि तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग की

सम्मेलन में कनाडा के प्रतिनिधि इरविन ड्राइवर, कोबर ने ‘रोबोटिक्स और कृत्रिम

बुद्धिमत्ता में अवसर’ विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि प्रिंट निर्माण ऐसा क्षेत्र है,

जहाँ रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता दोनों के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं। ड्राइवर

ने रोबोटिक्स के माध्यम से सामग्री के आवागमन तथा अन्य दोहराए जाने वाले कार्यों को

स्वचालित करने और कुशल ऑपरेटरों को उनके विशेषज्ञता वाले कार्यों के लिए अधिक समय उपलब्ध

थाईलैंड के प्रो. (डॉ.) अरन हंसुएबसाई ने प्रिंटिंग उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता

और रोबोटिक्स के उपयोग के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने

बताया कि इन तकनीकों का उपयोग प्रिंट उत्पादन की प्रक्रिया को अधिक स्वचालित, कुशल

और सटीक बनाने के साथ-साथ उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए किया जा सकता

है। ग्रीस के प्रो. (डॉ.) अनास्तासियोस ई. पोलिटिस एवं सुश्री एलेक्जेंड्रा वर्गोपोलू

ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स के आधुनिक अनुप्रयोगों के बारे में विस्तार से

जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में इन तकनीकों का वास्तविक रूप से किन-किन

क्षेत्रों में प्रयोग किया जा रहा है तथा प्रिंटिंग उद्योग में इनके व्यावहारिक उपयोग

भारत के केजी सुरेश ने तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव एवं

विशेषज्ञता साझा की। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकी विकास और उद्योग

से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त हुई। विभागाध्यक्ष डाॅ वंदना गुप्ता

तथा सम्मेलन सचिव डाॅ. बिजेंद्र कौशिक ने भी सम्मेलन को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। अंतिम दिन पैनल चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें विशेषज्ञों

और प्रतिभागियों के बीच विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

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