आईआईटी रुड़की में ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह की वार्षिक समीक्षा बैठक

रुड़की, 24 सितंबर । ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह की तीसरी वार्षिक समीक्षा बैठक गुरुवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में शुरू हुई। दो दिवसीय बैठक में प्रयोगशाला अनुसंधान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के व्यापक उपयोग पर मंथन किया जा रहा है।

बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनई, सलाहकार डॉ राकेश कौर, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत, अधिष्ठाता प्रो. विवेक मलिक और ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह के प्रधान अन्वेषक प्रो. एस.के. सिंगल मौजूद रहे।

बैठक में चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, रुड़की, गुवाहाटी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, हैदराबाद स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी और कश्मीर कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन सत्र में प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को केवल वैज्ञानिक नवाचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें व्यावहारिक, कम लागत वाली, अनुकूलनशील और बड़े पैमाने पर अपनाई जा सकने योग्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह की भूमिका प्रयोगशाला के उच्च स्तरीय शोध को किसानों, कारीगरों और ग्रामीण घरों तक पहुंचाने की है। इसके लिए जमीनी स्तर पर तैनाती, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय उद्यम मॉडल को मजबूत करना जरूरी है।

डॉ. परविंदर मैनई ने कहा कि शैक्षणिक शोध, तकनीकी विकास और जमीनी क्रियान्वयन के बीच निर्बाध जुड़ाव होना चाहिए। वैज्ञानिक नवाचार की सफलता उसके निरंतर उपयोग और अंतिम उपयोगकर्ता पर पड़े प्रभाव से मापी जानी चाहिए। उन्होंने कारीगरों और किसानों से निरंतर प्रतिपुष्टि, मानकीकृत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और प्रसार तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।

निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि तकनीक किसानों और कारीगरों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। इसमें विश्वसनीयता और उत्पादकता सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, उद्योगों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सहयोग जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *