मेहनत और नवाचार से चमकी किसान मोती लाल की किस्मत, अब प्रदेशभर में देंगे जैविक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण

जयपुर, 17 अगस्त । खेत में मेहनत, खेती में नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति समर्पण जब किसान हित की भावना से जुड़ता है, तो एक किसान की सफलता हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन जाती है। जयपुर जिले के मौजमाबाद क्षेत्र के प्रगतिशील कृषक मोती लाल ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय कार्यों और व्यावहारिक अनुभवों से ऐसी ही मिसाल कायम की है। उनकी कृषि के प्रति प्रतिबद्धता, नवाचार और किसानों को प्रेरित करने की क्षमता को देखते हुए कृषि विभाग, राजस्थान सरकार ने उन्हें ‘किसान ब्रांड एम्बेसडर’ एवं ट्रेनर के रूप में जोड़ने का निर्णय लिया है।

पंत कृषि भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल द्वारा मोती लाल को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किसान ब्रांड एम्बेसडर एवं ट्रेनर के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर उन्हें कृषि क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित भी किया गया। मोती लाल की विशेषता यह है कि वे 10वीं कक्षा तक शिक्षित होने के बावजूद अपने व्यावहारिक कृषि ज्ञान, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और प्रभावशाली संवाद क्षमता के कारण किसानों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे एक अच्छे मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं और अपने अनुभवों को सरल एवं प्रभावी तरीके से किसानों तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।

मोती लाल अब अपने खेत में किए गए सफल प्रयोगों और वर्षों के अनुभव को अपने तक सीमित नहीं रखेंगे। वे राजस्थान के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले कृषक प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, किसान संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करेंगे।

वे किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जैविक कृषि पद्धतियों, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, खेती में नवाचार तथा टिकाऊ कृषि तकनीकों के बारे में अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करेंगे।

‘किसान ब्रांड एम्बेसडर’ एवं ट्रेनर के रूप में मोती लाल को किसानों के बीच प्रशिक्षण एवं जागरूकता गतिविधियों के लिए श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, कोटा द्वारा 11 हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय प्रदान किया जाएगा।

किसान के अनुभव और सरकारी प्रशिक्षण व्यवस्था को जोड़ने वाली यह पहल प्रदेश में ‘किसान से किसान तक ज्ञान’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगी। इससे सफल किसानों के खेतों पर किए गए प्रयोग और स्थानीय स्तर पर विकसित कृषि ज्ञान सीधे अन्य किसानों तक पहुंच सकेगा।

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