पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की इस्लामाबाद हाई कोर्ट से मांग- ‘विशेषज्ञ डॉक्टर से आंखों की जांच कराने की अनुमति दें’

इस्लामाबाद (पाकिस्तान), 08 नवंबर । रावलपिंडी के अदियाला जेल में बंद देश के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी ने अपनी खराब होती आंखों की स्थिति को देखते हुए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) में एक याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने अपने खर्च पर किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से तुरंत जांच कराने की मांग की है। इसी जेल में पति इमरान के साथ वो भी बंद हैं।

द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बुशरा बीबी ने 190 मिलियन पाउंड के ‘अल-कादिर ट्रस्ट’ मामले में अपनी लंबित अपीलों के संबंध में दायर एक विविध आवेदन में अपनी खराब होती आंखों को देखते हुए अपने खर्च पर अपनी पसंद के डॉक्टरों से इलाज कराने की अनुमति भी मांगी है। बुशरा ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह अदियाला जेल प्रशासन को निर्देश दे कि वे उनका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड और एक नई, विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट पेश करें, जिसमें उनकी बीमारी और इलाज का पूरा विवरण हो।

बुशरा और इमरान को 190 मिलियन पाउंड के ‘अल-कादिर ट्रस्ट’ मामले में एक जवाबदेही अदालत दोषी ठहराते हुए सजा सुना चुकी है। दोनों सजा काट रहे हैं। जनवरी 2025 में जवाबदेही अदालत के जज नासिर जावेद राणा ने इमरान को 14 साल और उनकी पत्नी को 7 साल की जेल की सजा सुनाई थी। पूर्व प्रधानमंत्री पर 10 लाख रुपये और बुशरा बीबी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इस आवेदन में जेल के मेडिकल ऑफिसर के साथ-साथ एक नेत्र विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श कराने और जेल के बाहर किसी विशेष चिकित्सा केंद्र में जरूरी इलाज की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।

बुशरा और इमरान के वकील बैरिस्टर सलमान सफदर ने उच्च न्यायालय में एक हलफनामा भी जमा किया है। इसमें 2 नवंबर को अदियाला जेल में बंद इस दंपति के साथ हुई उनकी हालिया मुलाकात का विवरण दिया गया है। हलफनामे के अनुसार, मुलाकात के दौरान बुशरा ने बहुत गहरे रंग का चश्मा पहना हुआ था। जब उन्होंने सफदर और इमरान के कहने पर उन्हें हटाया तो वे काफी परेशान दिख रही थीं।

वकील के अनुसार, बुशरा न तो धूप बर्दाश्त कर सकती हैं और न ही कृत्रिम रोशनी। बिना सुरक्षा चश्मे के वे अपनी आंखें नहीं खोल पातीं। हलफनामे में कहा गया है कि इमरान भी उनकी बिगड़ती आंखों की रोशनी को लेकर चिंतित थे। याचिका में बताया गया है कि बुशरा ने सफदर को जानकारी दी कि जिन डॉक्टरों ने उनकी जांच की, उन्होंने उन्हें मोतियाबिंद बताया है औ 15 नवंबर के आसपास एक और आंख के ऑपरेशन की सलाह दी है।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि बुशरा ने अदियाला जेल में साफ-सफाई के स्तर और मिल रहे इलाज पर असंतोष जताया है। उन्होंने मांग की है कि उनकी जांच और इलाज उनकी पसंद के डॉक्टरों से कराया जाए। इसमें अगस्त में उच्चतम न्यायालय में सौंपी गई एक मेडिकल रिपोर्ट का भी जिक्र है, जिसमें उनकी आंखों की पुरानी समस्याओं और उसके बाद हुए इलाज (जिसमें रावलपिंडी के अल-शिफा ट्रस्ट आई हॉस्पिटल में हुई सर्जरी भी शामिल है) का पूरा विवरण दिया गया था।

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि वह अदियाला जेल अधीक्षक को निर्देश दें कि वे बुशरा की आंखों की जांच और इलाज के विवरण सहित उनका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड और एक नई विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट पेश करें। बुशरा ने अपनी तेजी से बिगड़ती आंखों की रोशनी का हवाला देते हुए जेल मेडिकल ऑफिसर की मौजूदगी में अपने खर्च पर किसी विशेषज्ञ नेत्र रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श कराने की भी मांग की है।

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