नई दिल्ली, 24 सितंबर । कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद फिर उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। तमिलनाडु ने पानी की कमी का दावा करते हुए कोर्ट से अपना हिस्सा दिलाने की मांग की है। कोर्ट ने कर्नाटक को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान तमिलनाडु और कर्नाटक ने अपना पक्ष रखा। तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि कर्नाटक लगातार तमिलनाडु के हिस्से का पानी दबा रहा है, जिससे राज्य में खरीफ की फसल पानी की कमी के कारण बर्बाद हो गई है। उन्होंने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) और कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की भूमिका पर भी सवाल उठाया।
वैद्यनाथन ने कहा कि हमारे आकलन के अनुसार तमिलनाडु में 20 टीएमसी पानी की कमी है, जबकि कर्नाटक के मुताबिक यह 16 टीएमसी है। अथॉरिटी हमारे इस घाटे को पूरा करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है और सिर्फ नाममात्र का पानी छोड़ने के निर्देश दे रही है। यदि इस कमी की भरपाई अभी नहीं की गई, तो काफी नुकसान होगा, क्योंकि मानसून अब जा चुका है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि सीडब्ल्यूएमए को तमिलनाडु के घाटे को पूरा करने का आदेश दिया जाए।
इसके विपरीत कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि उनका राज्य खुद भीषण सूखे का सामना कर रहा है। इसके बावजूद हम प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करते हुए पानी छोड़ रहे हैं। हमने 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब ढलान पर है और कर्नाटक को लौटते मानसून से बारिश मिलने की कोई उम्मीद नहीं है, जबकि तमिलनाडु को इसका पूरा लाभ मिलेगा।
बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि तमिलनाडु की ओर से कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं, इसलिए कर्नाटक को इस पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट ने इसके लिए कर्नाटक को एक सप्ताह का समय दिया है।