जयपुर, 31 अगस्त । चेक अनादरण मामलों की विशेष अदालत क्रम-12 ने प्लॉट बेचने के लिए ली गई राशि को वापस लौटाने के लिए दिए चेक के बाउंस होने पर विक्रेता कोयल सोलंकी को एक साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्ता पर चालीस लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। पीठासीन अधिकारी सिमरन सिंह वर्मा ने अपने आदेश में कहा कि अपराध आर्थिक क्षेत्र से संबंधित है और इस अपराध के लिए अभियुक्ता को परिवीक्षा का लाभ देना उचित नहीं है।
परिवादी रामलाल यादव की ओर से अधिवक्ता महावीर सुरेन्द्र जैन ने अदालत को बताया कि परिवादी के साथ अभियुक्ता व उसके पति अशोक सौलंकी ने प्लॉट बेचने का एग्रीमेंट कर चौबीस लाख रुपए प्राप्त किए थे। जब अभियुक्त व उसका पति प्लॉट देने में असमर्थ हुए तो अभियुक्ता कोयल ने परिवादी को 24 लाख रुपए का चेक दे दिया। जब परिवादी ने चेक भुनाने के लिए बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। परिवाद में कहा गया कि अभियुक्ता ने चेक जारी कर भुगतान नहीं किया है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अभियुक्त को सजा और जुर्माने से दंडित किया है।