जयपुर, 06 नवंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपियों की ओर से पेश अपील को खारिज कर दिया है। सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश मोहम्मद रियाज अत्तारी और मोहम्मद गौस सहित आधा दर्जन अन्य आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिए। अपील में आरोपियों ने एनआईए कोर्ट की ओर से उनके खिलाफ विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में आरोप तय करने को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अदालत को अपीलार्थियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस कारण नहीं मिला है। इस स्तर पर अदालत को यह पता लगाना है कि क्या अभियोजन सामग्री आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनाती है, न कि उनके अपराध करने या निर्दोषता को निर्धारित करने के लिए साक्ष्य की सूक्ष्म जांच करनी है।
अपीलों में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य का उचित मूल्यांकन किए बिना उन पर विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 16, 18 और धारा 20 के तहत आरोप तय किए हैं। कन्हैया लाल की ओर से एक टीवी शो के दौरान नुपुर शर्मा की ओर से पैगंबर साहब के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को फॉरवर्ड करने के कारण कथित घटना हुई थी। मृतक का कथित कृत्य उकसाने वाला था। ऐसे में अपीलार्थियों के खिलाफ यूएपीए का अपराध नहीं बनता। आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि बरामद वीडियो में ऐसा कोई भी शब्द या सामग्री नहीं है, जिसे किसी भी तरह से सार्वजनिक शांति को बिगाड़ने या क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डालने के रूप में देखा जाए। इसके अलावा ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं है जिससे यह संकेत मिलते हो कि अपीलार्थी किसी गैर कानूनी संगठन के सदस्य हो। इसलिए विशेष न्यायालय की ओर से उनके खिलाफ मशीनी अंदाज में किए गए आरोप तय के आदेश को रद्द किया जाए। जिसका विरोध करते हुए एएसजी राजा ठाकरे ने कहा कि धारा 18 के तहत आपराधिक षड्यंत्र व्यापक दायरे वाला है। इसमें वास्तविक कृत्य के साथ ही षड्यंत्र, उकसावा, प्रोत्साहन और सुविधा प्रदान करना भी शामिल है। इस धारा के अपराध के लिए वास्तविक आतंकी कृत्य का पूरा होना जरूरी नहीं है, बल्कि घटना से पहले की परिस्थिति षड्यंत्र को निर्धारित करने का महत्व ले सकती है। इसके अलावा बरामद वीडियो को मुकदमे की ट्रायल के दौरान परीक्षण किया जाएगा। किसी विशेष बात के नहीं होने को अपने आप में अपराध की अनुस्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
गौरतलब है कि 28 जून, 2022 को कन्हैयालाल की हत्या कर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। मामले में एनआईए कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ यूएपीए एक्ट के साथ ही आईपीसी की विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए थे।