नई दिल्ली, 22 सितंबर । उच्चतम न्यायालय में वंदे मातरम मामले पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को माहौल उस समय गरमा गया, जब सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने “नक्सली” शब्द का इस्तेमाल किया। उनकी इस टिप्पणी का वरिष्ठ वकील एवं ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने कड़ा विरोध जताया।
सुनवाई के दौरान जब मुरलीधर ने कहा कि वंदेमातरम के सभी छंद नहीं सुनाने वालों को दंडित किया जा रहा है। इस पर मेहता ने कहा कि जो लोग संसद में इसे पारित करने से नहीं रोक पाए, वो कोर्ट आ गए। संसद देश के संविधान के अनुसार चलती है, न कि नक्सलियों के तौर-तरीकों से। मेहता की ओर से नक्सली शब्द के इस्तेमाल का मुरलीधर ने कड़ा प्रतिवाद किया। इस पर मेहता ने कहा कि वे ये शब्द वापस नहीं लेंगे।